अंग्रेजों ने चली ऐसी चाल कि दो हिस्सों में बट गया हिंदुस्तान

5 अगस्त एक ऐसी तारीख है जिसकी तुलना 26 जनवरी को छोड़कर किसी और दिन के साथ नहीं की जा सकती। 15 अगस्त 1947 की वो तारीख जिस दिन भारत को ब्रिटिश राज से आज़ादी मिली लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत को आजादी मिलने के लिए किसी और तारीख पर सहमति बनी थी लेकिन अंग्रेजों ने अपनी चाल को सफल बनाने के लिए इसे बदलवा दिया।

इस दिन मिलनी थी भारत को आजादी

असल में साल 1930 से ही कांग्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए 26 जनवरी के दिन का चयन कर चुकी थी. लेकिन फरवरी 1947 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट रिचर्ड एटली ने घोषणा की कि सरकार 30 जून 1948 के दिन भारत को आजाद कर देगी. जिसके बाद लुई माउंटबेटन को आखिरी वायसराय नियुक्त किया गया और भारत को आजादी देने की जिम्मेदारी दी गई.

क्यों बदली गई आजादी की तारीख

उस समय ब्रिटिशों को इस बात की भनक लग गयी कि मोहम्मद अली जिन्ना को कैंसर है और वो ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगे। जिसकी वजह से अंग्रेजों को चिंता हुई कि अगर जिन्ना नहीं रहे तो महात्मा गांधी अलग देश न बनाने के प्रस्ताव पर मुसलमानों को मना लेंगे। इसलिए उन्होंने 30 जून 1948 का इंतजार न करके भारत को 15 अगस्त 1947 को ही आजाद कर दिया जिससे अंग्रेज अपनी चाल में सफल हो गए और भारत का बंटवारा हो गया.

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